प्रयागराज में माघ मेले की भव्य शुरुआत: पौष पूर्णिमा पर 31 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी

ब्यूरो रिपोर्ट। magh  mela prayagraj संगम नगरी प्रयागराज में माघ मेले की धूमधाम से शुरुआत हो गई। पौष पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही लाखों श्रद्धालु गंगा-यमुना-सारस्वत का पवित्र संगम तट पर उमड़ पड़े। शाम आठ बजे तक करीब 31 लाख भक्तों ने ठंडी लहरों में डुबकी लगाकर आस्था का अभिषेक किया। इनमें पांच लाख कल्पवासी भी शामिल थे, जो दूर-दूर से आए थे। सूर्योदय की सुनहरी किरणों के साथ घंटों की आरती की ध्वनियां हवा में गूंजीं, तो श्रद्धालुओं के चेहरे पर आस्था और भक्ति साहब झलक रही थी।

इस 45 दिनों के मेले में कुल 15 करोड़ भक्तों के आने की उम्मीद है, जो आस्था और संस्कृति का अनुपम संगम बनेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों पर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। 120 करोड़ के बजट से निर्मित मजबूत घाट बलुआ पत्थरों से जगमगा रहे हैं, जबकि सात हजार अस्थायी टेंट रंग-बिरंगे झंडों और फूलों की मालाओं से सजे नजर आ रहे। रेलवे ने 500 विशेष ट्रेनें चलाईं, जो स्टेशनों पर भक्तों की उमंग से गूंज रही हैं। एयरपोर्ट पर विमानों की गर्जना यात्रा को सुगम बना रही है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा पर जोर

प्रशासन ने सुरक्षा का कवच अटूट रखा। अपर पुलिस महानिदेशक संजीव गुप्ता, आईजी अजय मिश्र, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल और पुलिस कमिश्नर जोगिंदर सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारी रात से ही मेला क्षेत्र में डेरा डाले हुए थे। वे लगातार घूम-फिरकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे और आवश्यक निर्देश देते रहे। 50 हजार पुलिसकर्मी ड्रोन निगरानी और सीसीटीवी जाल के सहारे तैनात रहे, जिससे कोई अप्रिय घटना न घट सके। स्वास्थ्य कैंपों में डॉक्टरों की फौज मुफ्त दवाओं के साथ तैनात रही, जबकि 24x7 हेल्पलाइन और डिजिटल ऐप ने भीड़ प्रबंधन को आसान बनाया। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक-मुक्त अभियान भी चलाया गया।

नई सुविधाओं ने जोड़ा रंग 


इस बार माघ मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई नई व्यवस्थाएं शुरू की गईं। 17 नंबर पार्किंग से लेटे हनुमान मंदिर तक गोल्फ कार्ट सेवा चालू हुई, जिसका लाभ करीब नौ हजार भक्तों को मिला। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को यह सेवा मुफ्त भी प्रदान की गई। वहीं, रैपिडो बाइक सेवा से करीब दस हजार बुकिंग हुईं, जिससे लोग मेला क्षेत्र तक जल्दी पहुंच सके। अस्थायी पुलों पर पैदल यात्रियों की रेलम-पेल रही, तो सड़कें चिकनी कालीन की तरह चमक रही।

सांस्कृतिक मंचों पर भजन-कीर्तन की मधुर धुनें गूंज रही हैं, जबकि साधु-संतों के कल्पवास कैंपों में ध्यान की शांति का वातावरण है। मकर संक्रांति (14 जनवरी) के मुख्य स्नान की प्रतीक्षा में पूरा मेला क्षेत्र उत्साह से भरा है। प्रशासन की सतर्कता और योजना के दम पर पौष पूर्णिमा का स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सफल रहा। सभी श्रद्धालु संतुष्ट मुद्रा में अपने घर लौटे, जो आस्था और व्यवस्था का जीवंत उदाहरण बन गया।
प्रयागराज से अभिषेक कांत पांडेय की रिपोर्ट 
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