आइए! नए साल में नई ऊर्जा के साथ एक नए भारत के निर्माण की दिशा में बढ़ाएं कदम : मकसूद
देवरिया।भाटपार रानी तहसील क्षेत्र के भोपतपुरा गांव निवासी कवि,शायर, पत्रकार व समाजिक चिन्तक मकसूद भोपतपुरी ने नए वर्ष 2026 के मौके पर जारी एक बयान में कहा कि हमें नए साल के मौके पर एक नए भारत बनाने का संकल्प लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नए साल 2026 में कुछ नयापन जरूर दिखनी चाहिए। यह नयापन मानव के जीवन शैली, सोच, व्यवहार, संस्कार व कार्य प्रणालियों में अवश्य झलकनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे महान देश है।हमारे मुल्क की महानता यहां की सर्व धर्म समभाव, सहिष्णुता, आपसी एकता, प्रेम, भाईचारा, परस्पर सहयोग व विश्व बंधुत्व की भावना के कारण है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन मूल्यों में कमी आई है। आपसी सहयोग के बजाए लोगों में एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने की भावना पनपती जा रही है। वहीं सर्व धर्म समभाव के बजाए अपने ही धर्म को उच्च मानने व बाकी धर्मों को नीचा दिखाने की भावना ने साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने का काम किया है। वहीं एक दूसरे से प्रेम व भाईचारे की व्यवहार के बजाए नफरत की भावनाएं मनुष्य को पशु की ओर धकेलने का काम कर रही हैं। इसके अलावा जनता के चुने हुए अधिकांश जनप्रतिनिधियों में समाज व राष्ट्रहित के बजाए स्वहित की भावना मजबूत होती जा रही है। सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में अब ज्यादातर लोगों का विश्वास हमारे नेताओं के अलावा न्यायपालिका व पत्रकारिता पर से भी खत्म होती जा रही है। पूर्व की भांति हम नए साल का जश्न मना रहे हैं। वहीं हम शब-ए-बरात, होली, ईद, रामनवमी, बकरीद, मुहर्रम, रक्षाबन्धन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, दीपावली, दशहरा आदि सभी पर्व इस नए साल में भी मनाएंगे। लेकिन इन पर्वों की मिठास व खुशियां तभी बढ़ेंगी, जब हम अपनी पुरातन गंगा-जमुनी तहजीब, सर्व धर्म समभाव, कौमी एकता, सभी जातियों व धर्मों के प्रति सम्मान की भावना, परस्पर प्रेम, सहयोग, आपसी भाईचारे की भावना को पहले से अधिक मजबूत करेंगें और अपने अंदर मनुष्यता व इंसानियत की भावनाओं को सदा जिंदा रखेंगें। देश का नवनिर्माण तभी होगा, जब हम गरीबों,बेबसों व कमजोरों के लिए मददगार व जरूरतमन्दों के लिए सहारा बनकर खड़े होंगे। हम आइए हम नए साल में एक नई जज्बा के साथ एक नए भारत के निर्माण की दिशा में मिलजुलकर अपना कदम आगे बढ़ाएं।
